सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली मलाला यूसुफजई को 10 अप्रैल 2017 को संयुक्त राष्ट्र का शांति दूत नियुक्त किया गया. मलाला संयुक्त राष्ट्र की अब तक की सबसे युवा शांति दूत होंगी.
नियुक्ति संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो जीटरस द्वारा की जाएगी. यूसुफजई की नई भूमिका में दुनिया भर में बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद करना भी शामिल होगा.
मलाला के बारे में मुख्य बातें:
• 16 वर्ष की उम्र में, पाकिस्तानी कार्यकर्ता को तालिबान के एक बंदूकधारी ने सिर में गोली मार दी थी. समूह पर लगे प्रतिबंध को मानने से इनकार करने और महिलाओं की शिक्षा की वकालत करने की सजा के तौर पर उसने यह काम किया था.
• इस घटना ने उन्हें मानवाधिकरों और लड़कियों के स्कूल जाने के लिए जंग लड़ने की प्रेरणा दी और इसे अंतरराष्ट्रीय आंदोलन बनाया.
• वर्ष 2014 में यूसुफजई सबसे कम उम्र की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता बनी थीं.
• उन्हें कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रिदेउ ने 12 अप्रैल 2017 को कनाडा के संसद को संबोधित करने के लिए आमंत्रण भेजा है, इसके साथ ही वह ऐसा अवसर प्राप्त करने वाली सबसे युवा व्यक्ति बन गईं हैं.
• इस अवसर पर उन्हें 2014 में दिए जा चुके मानद कनाडाई नागरिकता भी प्रदान की जाएगी.
मलाला के दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए एंटोनियो जीटरस ने कहा कि गंभीर खतरे में भी इन्होंने महिलाओं, बालिकाओं और सभी लोगों के अधिकारों के प्रति अविश्वसनीय प्रतिबद्धता दिखाई है. उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि हालांकि बालिकाओं की शिक्षा के लिए इनके साहसपूर्ण सक्रियता ने पहले ही दुनिया भर में कई लोगों को प्रेरित किया है, संयुक्त राष्ट्र की सबसे युवा शांति दूत होने के नाते ये और अधिक शांतिपूर्ण विश्व बनाने में पहले से अधिक योगदान कर पाएंगीं.
यूसुफजई, जिनका इलाज ब्रिटेन में हुआ था, तब से वहीं पढ़ाई कर रही हैं और विकासशील देशों में बालिका शिक्षा परियोजनाओं के समर्थन के लिए मलाला कोष की स्थापना की प्रक्रिया में भी लगी हैं. इसके अलावा, युवा कार्यकर्ता, जो विश्व मंच पर एक नियमित वक्ता भी हैं, ने जुलाई 2016 में बुरुंडी और सोमालिया की शरणार्थी बालिकाओं की दुर्दशा को उजागर करने के लिए रवांडा और केन्या के शरणार्थी शिवरों का दौरा भी किया था.
नियुक्ति संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो जीटरस द्वारा की जाएगी. यूसुफजई की नई भूमिका में दुनिया भर में बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद करना भी शामिल होगा.
मलाला के बारे में मुख्य बातें:
• 16 वर्ष की उम्र में, पाकिस्तानी कार्यकर्ता को तालिबान के एक बंदूकधारी ने सिर में गोली मार दी थी. समूह पर लगे प्रतिबंध को मानने से इनकार करने और महिलाओं की शिक्षा की वकालत करने की सजा के तौर पर उसने यह काम किया था.
• इस घटना ने उन्हें मानवाधिकरों और लड़कियों के स्कूल जाने के लिए जंग लड़ने की प्रेरणा दी और इसे अंतरराष्ट्रीय आंदोलन बनाया.
• वर्ष 2014 में यूसुफजई सबसे कम उम्र की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता बनी थीं.
• उन्हें कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रिदेउ ने 12 अप्रैल 2017 को कनाडा के संसद को संबोधित करने के लिए आमंत्रण भेजा है, इसके साथ ही वह ऐसा अवसर प्राप्त करने वाली सबसे युवा व्यक्ति बन गईं हैं.
• इस अवसर पर उन्हें 2014 में दिए जा चुके मानद कनाडाई नागरिकता भी प्रदान की जाएगी.
मलाला के दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए एंटोनियो जीटरस ने कहा कि गंभीर खतरे में भी इन्होंने महिलाओं, बालिकाओं और सभी लोगों के अधिकारों के प्रति अविश्वसनीय प्रतिबद्धता दिखाई है. उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि हालांकि बालिकाओं की शिक्षा के लिए इनके साहसपूर्ण सक्रियता ने पहले ही दुनिया भर में कई लोगों को प्रेरित किया है, संयुक्त राष्ट्र की सबसे युवा शांति दूत होने के नाते ये और अधिक शांतिपूर्ण विश्व बनाने में पहले से अधिक योगदान कर पाएंगीं.
यूसुफजई, जिनका इलाज ब्रिटेन में हुआ था, तब से वहीं पढ़ाई कर रही हैं और विकासशील देशों में बालिका शिक्षा परियोजनाओं के समर्थन के लिए मलाला कोष की स्थापना की प्रक्रिया में भी लगी हैं. इसके अलावा, युवा कार्यकर्ता, जो विश्व मंच पर एक नियमित वक्ता भी हैं, ने जुलाई 2016 में बुरुंडी और सोमालिया की शरणार्थी बालिकाओं की दुर्दशा को उजागर करने के लिए रवांडा और केन्या के शरणार्थी शिवरों का दौरा भी किया था.