राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 12 अप्रैल 2017 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार-2016 प्रदान किए.
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संस्थागत एवं शैक्षणिक दोनों ही स्तरों पर भूवैज्ञानिक अनुसंधान की एक समृद्ध परंपरा रही है.
26 भूवैज्ञानिकों को वर्ष 2016 के लिए भूविज्ञान के 11 क्षेत्रों में उनके प्रतिभाशाली योगदानों के लिए राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान किए गए. राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा के डॉ. अभिषेक साहा को युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिला जिनकी विशेष रूप से राष्ट्रपति एवं खनन मंत्री ने सराहना की.
इस वर्ष पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक जीएसआई, सीएसआईआर, आईआईटी एवं विभिन्न निजी क्षेत्र तथा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के भूवैज्ञानिकों के एक ग्रहणशील समूह से संबंधित थे.
राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार
राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक पुरस्कार जिसे पूर्व में राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार के नाम से जाना जाता था, का गठन 1966 में खनन मंत्रालय द्वारा किया गया और 2009 से भूविज्ञान के समस्त क्षेत्रों को पुरस्कार के दायरे में लाने के लिए इसे राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार का नाम दिया गया. खनन मंत्रालय ने इन पुरस्कारों का गठन वैज्ञानिकों एवं वैज्ञानिकों की टीमों को मूलभूत तथा अनुप्रयुक्त भूविज्ञान तथा खनन एवं संबंधित क्षेत्रों में उनकी असाधारण उपलब्धियों एवं योगदान को सम्मानित करने के लिए किया था.
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संस्थागत एवं शैक्षणिक दोनों ही स्तरों पर भूवैज्ञानिक अनुसंधान की एक समृद्ध परंपरा रही है.
26 भूवैज्ञानिकों को वर्ष 2016 के लिए भूविज्ञान के 11 क्षेत्रों में उनके प्रतिभाशाली योगदानों के लिए राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान किए गए. राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा के डॉ. अभिषेक साहा को युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिला जिनकी विशेष रूप से राष्ट्रपति एवं खनन मंत्री ने सराहना की.
इस वर्ष पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक जीएसआई, सीएसआईआर, आईआईटी एवं विभिन्न निजी क्षेत्र तथा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के भूवैज्ञानिकों के एक ग्रहणशील समूह से संबंधित थे.
राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार
राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक पुरस्कार जिसे पूर्व में राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार के नाम से जाना जाता था, का गठन 1966 में खनन मंत्रालय द्वारा किया गया और 2009 से भूविज्ञान के समस्त क्षेत्रों को पुरस्कार के दायरे में लाने के लिए इसे राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार का नाम दिया गया. खनन मंत्रालय ने इन पुरस्कारों का गठन वैज्ञानिकों एवं वैज्ञानिकों की टीमों को मूलभूत तथा अनुप्रयुक्त भूविज्ञान तथा खनन एवं संबंधित क्षेत्रों में उनकी असाधारण उपलब्धियों एवं योगदान को सम्मानित करने के लिए किया था.